मध्यमकालीन हिंदी काव्य (Medieval Hindi Poetry) भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह काव्य विशेष रूप से 12वीं से लेकर 18वीं शताब्दी तक रचा गया। इस अवधि के काव्य में धर्म, भक्ति, प्रेम, और सामाजिक जीवन की विभिन्न अवधारणाओं को प्रमुखता दी गई है। इस समय में कविता के कई रूप और शैलियाँ विकसित हुईं।
मध्यमकालीन हिंदी काव्य को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा जा सकता है:
भक्ति काव्य में प्रमुख रूप से ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण को व्यक्त किया गया है। इस काव्य में भक्तों ने भगवान की भक्ति को एक साधना और मोक्ष का मार्ग माना।
कुछ प्रमुख कवि और संत:
सूफी काव्य में ईश्वर के प्रति प्रेम और आत्मा की पवित्रता की बातें की जाती हैं। सूफी संतों ने प्रेम और भक्ति को एक अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया।
राजपूत काव्य में वीरता, युद्ध और अपने क्षेत्र की रक्षा की भावना को प्रमुखता दी गई है। यह काव्य रचनाएँ आमतौर पर ऐतिहासिक घटनाओं और महान व्यक्तित्वों पर आधारित होती हैं।
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